प्रेम-कालिन्दी_Prem Kalindi

  1. अब इस शेष विदा के क्षण में 
  2. अब तो स्वरमय प्राण हमारे 
  3. अब मेरी पीड़ा से खेलो 
  4. अब ये गीत तुम्हारे 
  5. अश्रुकण झड़ते रहे, प्रिय ! 
  6. आँखें 
  7. आज की रात 
  8. आज तो पूनो मचल पड़ी 
  9. इतनी उलझन क्यों आनन पर 
  10. इस जलते जीवन का प्रमाद 
  11. इस दुर्बल तन के मिटने पर 
  12. इस पार कौन ? उस पार कौन? 
  13. इस मधुर स्वप्न का कहीं अंत 
  14. उनकी हँसी 
  15. एक गाँव में रहते हम-तुम 
  16. एक दिन वासंती संध्या में 
  17. ओ चारुशीले ! 
  18. ओ पिया ! दुःख की अँधेरी रात में ही 
  19. ओ पिया ! मुझे फिर वैसा ही कर दे 
  20. कभी फिर होगा मिलन तुम्हारा ? 
  21. कहाँ जायेंगे सपने मन के ? 
  22. कागज की लिखावट 
  23. कामरूप 
  24. क्या मैंने तुम्हारे नाम को हवाओं पर नहीं लहरा दिया है 
  25. क्या है इस मन में ! 
  26. कितना अच्छा होता 
  27. किसीकी ओर मत देखो 
  28. कैसे कह दूँ, था संयोग 
  29. कैसे मिले प्राण-प्राणों से 
  30. कोई जा रहा सवेरे-सवेरे 
  31. कोयल की कुहुक का यहीं अंत है 
  32. कौन पहला अपना रुख मोड़े ? 
  33. कौन सि पहचान होगी 
  34. खिल-खिल कर हँसती हो जब तुम 
  35. गिरा, खोया हुआ जैसे कहीं, कुछ पा गया हूँ मैं 
  36. गीत बनकर ही अधर के पास आना चाहता हूँ 
  37. गुम्फन 
  38. चली आओ 
  39. चाँदनी कलि-सी खिलती जाती 
  40. चाँदनी जलविहार को उतरी 
  41. चाँदनी मेरे नंदन की 
  42. चाँदनी तारों पर फिरती 
  43. चाँदनी वन के बीच खिली 
  44. चाँद से रूठ गयी चाँदनी 
  45. जब तक तुम नहीं मिली थी 
  46. जब तुम मुझे देख लेती हो 
  47. जब न रहूँगा मैं 
  48. जब भी नाम हमारा आये 
  49. जब मुझे जाना ही है तो फिर हँस कर विदा करो 
  50. जब मैं अंतिम साँस खींच 
  51. जब यह जीवन फिर पायेंगे 
  52. जागरिता 
  53. जी करता है आँखे मूँदूँ
  54. जीवन एक दीप ही तो है 
  55. ज्योत्स्ना उर-उर की उर्वशी 
  56. तारों की सज आरती  
  57. तीन चित्र  
  58. तुम 
  59. तुम इतनी सुन्दर हो 
  60. तुमको छोड़ चला जाऊँगा 
  61. तुम कौन पिकी सी रही बोल ? 
  62. तुम प्रेम न इतने बनो क्रूर 
  63. तुम्हारा पत्र 
  64. तुम्हारी चेतना के तीर पर प्यासा खड़ा हूँ मैं 
  65. तुम्हारे रूप-मधुवन में समीरण मैं बनूँ तो क्या ! 
  66. तुम्हें देखे कितने दिन हुए 
  67. दान 
  68. दुहराने से नहीं ऊबना है 
  69. देह नहीं देहेतर से मैं करता प्यार रहा हूँ 
  70. दृगों को कर गयी शीतल किसीके रूप की ज्वाला 
  71. धरती और आकाश के बीच की समस्त संपदा 
  72. नहीं है नया हमारा प्यार 
  73. नीली साड़ी पहने तुम चाँदनी रात सी 
  74. पथ के अंतिम मोड़ पर 
  75. प्रतिबिम्ब तो झील की नील लहरों में 
  76. प्रथम दर्शन 
  77. पावस-प्रिया 
  78. पास-पास ही रहिये 
  79. पास रहकर भी कितनी दूरी ! 
  80. प्राण-वीणा को सुनहले तार जब खुलने लगेंगे 
  81. फिर होगा जीवन का विचार 
  82. फूल मुरझा गए देखते देखते 
  83. बहने दो जीवन को अबाध  
  84. बात अधरों की हुई न पूरी 
  85. बातचीत 
  86. माना कि आज 
  87. मिलेंगे फिर भी यदि जीवन में 
  88. मुझे तुम्हारा स्नेह चाहिए 
  89. मुझे भुला ही देना 
  90. मुझे शब्द नहीं मिलते 
  91. मुझे स्वीकार मत करना 
  92. मेरा चित्र तुम्हारे कर में  
  93. मेरी कविता में अपनी छाया देखकर 
  94. मेरे और तुम्हारे बीच में 
  95. मेरे गीत तुम्हारे ही तो हैं 
  96. मेरे चारों ओर रंगीन तितलियाँ उडती हैं 
  97. मेरे जाने की वेला है  
  98. मेरे जीवन का इतिहास 
  99. मेरे लिए प्रतीक्षा मत करना 
  100. मेरे शब्द होठों पर आकर अटक गए है 
  101. मैं तो केवल तुम्हें चाहता हूँ  
  102. मैं फिर भी यहाँ आऊँगा  
  103. मैं फिर यहीं खिलूँगा 
  104. मैंने क्या कुछ नहीं कहा है 
  105. मैंने गीत लिखे जिस सुर में 
  106. मैंने जितना प्यार किया है तुमको 
  107. मैंने तुम्हें वहां से ग्रहण किया है 
  108. मैंने बरबस होंठ सिये थे 
  109. मैंने रंग-रंग के फूल बिछाए हैं 
  110. मोल नहीं लूँगा इन क्षणों का  
  111. मृत्यु 
  112. यदि किसी सागर परिवेष्ठित द्वीप पर 
  113. यदि तुम्हारा जी चाहता है 
  114. यह इतिहास अनंत एक लघु क्षण में ले लो 
  115. यह कैसी विडंबना है 
  116. यह जानकार क्या होगा 
  117. यह मेरे मन का अन्धकार 
  118. यह सच है 
  119. यह सही है 
  120. यों तो कितनी ही बार 
  121. रात, तुम्हारे कर में 
  122. रोते-रोते चुका नयन का पानी 
  123. विरहिनी 
  124. विरही 
  125. वे आँखें 
  126. वैराग्य के सभी सूत्र मैंने घोंट डाले हैं 
  127. शाश्वत सौन्दर्य 
  128. सहन नहीं है विरह भी क्षण का 
  129. साथ भी सदा न हम रह पायें 
  130. सुन्दरता और कविता 
  131. हमारा प्यार अधूरा है 
  132. हमारे वे दिन बीत गये 
  133. हमारे सपने बिखर गये 
  134. हर विषपान के बाद