usha

भीख स्नेह की सजल नयन कितनी ही माँगे
कोई लौट सका है जीवन में बढ़ आगे!
जीवन तो बस एक दाँव, हारे या जीते
आये मुट्ठी बाँध, चले युग कर ले रीते