guliver ki chauthi yatra

वर्षगाँठ

मुँह बाये राहु खड़ा ग्रसने को इंदु है
प्रतिपल लय होता शून्य तम में ज्योति बिंदु है
वर्षगाँठ कब तक मनायेगी जीर्ण नाव जिसे
एक-एक वर्ष एक-एक महासिंधु है!