geet ratnavali

डोली सज दे ओ री माई

देख लिवाने आये स्वामी, कर दे शीघ्र विदाई

 

उबटन रगड़ मुझे नहला दे

माँग बीच सिन्दूर सजा दे

पाँव महावर लगा उढ़ा दे चूनर लाल रँगाई

 

खड़े कहार द्वार पर कब से

लौटें सखियाँ, कह दे सब से

मेरा राम-राम ले, अब से मैं हो गयी परायी

 

नया नहीं है आज सवेरा

ताक रहे सब मुँह क्यों मेरा?

देखूँ ‘उन्हें’ हटा यह घेरा बजने दे शहनाई