geet vrindavan

दूत ने माँ के वचन सुनाये
कहना मोहन से–‘मिल जा अब जाने के दिन आये

‘सूना है व्रजमंडल तेरा
भवन बना भूतों का डेरा
पति को तेरे दुःख ने घेरा
रहते शीश झुकाए

‘तेरी कीर्ति-कथायें सुनकर
पुलक-पुलक उठता है अंतर
माँ का जी कैसे माने पर

उर से बिना लगाए !

‘तन रह गया सूख कर आधा
मलिन-वेश रोती है राधा
बेटे! यों किसने मन बाँधा

हम सब हुए पराये !’

दूत ने माँ के वचन सुनाये
कहना मोहन से–‘मिल जा अब जाने के दिन आये