hum to gaa kar mukt huye

कौन अब सुनेगा ये गीत!

एक-एक करके जा रहे हैं सभी मीत

 

वन में ज्यों लगी आग

डर-डर कर रहे भाग

विहगों  के दल विकल, सभीत

 

काल जिसे लिखता है

पृष्ठ शून्य दिखता है

जीवन सपने-सा रहा बीत

 

क्षीण तड़ित-रेखा है

शेष कुल अदेखा है

आगे नीलाभ, मौन, शीत

कौन अब सुनेगा ये गीत!

एक-एक करके जा रहे हैं सभी मीत

 

Jan 97