hum to gaa kar mukt huye

हम तो गाकर मुक्त हुए

तेरी थाती जन-जन तक पहुँचाकर मुक्त हुए

 

कुछ भी किया न हो जीवन में

लेकर एक विकलता मन में

देखे जो सपने क्षण-क्षण में

दोनों हाथों से वे आज लुटाकर मुक्त हुए

 

जिसको मन का मीत बनाया

पर न मिलन जिससे हो पाया

वही शेष पल में ज्यों आया

शब्द-शब्द से उसको गले लगाकर मुक्त हुए

 

अणु-अणु में जो व्याप्त अगोचर

रवि-शशि में, तारों में भास्वर

शाश्वत, पूर्ण, सत्य, शिव सुन्दर

उसकी छाया अपने स्वर में पाकर मुक्त हुए

हम तो गाकर मुक्त हुए

तेरी थाती जन-जन तक पहुँचाकर मुक्त हुए

Nov 86