kitne jivan kitni baar

हार नहीं मानूँगा

बाजी एक हार भी जाऊँ, और नयी ठानूँगा

 

गरजे व्योम, जलद घहरायें

कितनी भी हों क्रूर दिशायें

आयें, जो पवि-पाहन आयें

मैं सीना तानूँगा

 

यह संसार भले ही छूटे

आस्था की दृढ डोर न टूटे

रूप रचा कितने भी झूठे

तुझको पहचानूँगा

हार नहीं मानूँगा

बाजी एक हार भी जाऊँ, और नयी ठानूँगा