kitne jivan kitni baar

अब ये गीत तुम्हारे 

जिनमें सँजो दिए हैं मैंने अपने सपने सारे

जब भी आशा की लौ खोयी
जब भी जागी सुधियाँ सोयी
जब भी चोट लगी है कोई
मैंने इन्हीं सुरों में अपने मन के भाव उतारे

चाहो तो अपना लो इनको

चाहो तो ठुकरा दो इनको
गाकर भले भुला दो इनको
किन्तु चमकते सदा रहेंगे  ये ज्यों नभ के तारे

जब जैसा कुछ जी में आया

मैंने इन गीतों  में गाया
बहुत यही, स्वर तुमको भाया
अब यह खेल समाप्त हो चला, क्या जीते या हारे !