usar ka phool

जय हो

 

दुख पर सुख, तम पर प्रकाश की

जड़ता पर गति की, विकास की

मरण-त्रास पर मनुज-श्वास की

अग्नि-शिखा अक्षय हो

 

निज पर पर, नर पर नरत्व की

पंचतत्व पर आत्म-सत्व की

घन-महत्त्व पर जन-समत्व की

संघ-शक्ति का भय हो

 

कुटिल असुन्दर पर सुन्दर की

पवि कठोर पर कोमल कर की

प्रलय-क्षितिज पर विश्वंभर की

नव-ज्योति का उदय हो

 

जय हो!

1950