बलि-निर्वास_Bali Nirvas

  1. कल्प वृक्ष की सबसे ऊँची शाखा पर से  
  2. दम्भपूर्ण अधिकार, स्वार्थ या चिर-अबाध वासना-विलास  
  3. राई में सुमेरु ज्यों विशाल वट बीज में हो  
  4. वांछित जो माँगें आप, सौंवे बलिकाल में  
  5. यदि स्वर्ग कहीं है त्रिभुवन में 
  6. जीवन-संध्या में आज, पथिक तुम थके और हारे-से हो  
  7. जीवन वसंत सा हुआ 
  8. मधुप ! तुम भूल गए रस-केलि 
  9. मधुप तुम कबसे हुए विरागी 
  10. मधुकर यह मधुवन क्यों भूले  
  11. मधुप तुम भूले प्रीति पुरातन  
  12. मना लूँ मन को तो, सजनी !  
  13. मधुकर तुम हो बड़े प्रवीण 
  14. सखी री! समय-समय की बात  
  15. अवधि में क्या हो, किसे पता ! 
  16. सखी री ! इतने बैरी तेरे 
  17. अमरे ! तुझसे अच्छी काशी 
  18. सखी री, ! बीत गये दिन कितने 
  19. विरह कि यह तो पीर नहीं 
  20. मैंने जो व्रत-नेम किये 
  21. फड़कती क्यों यह दायीं आँख 
  22. नयन के शर-संधान किये