alok vritt

यह नूतन इतिहास आज कवि लिखने जिसे चला है
पशुबल पर आत्मा की जय का उदाहरण पहला है

विजय असत्य-अनाचारों पर सत्याग्रही विनय की
मृण्मय पर चिन्मय की, जड़ पर चेतन की, गतिमय की
राजनीति पर लोकनीति की, बलि पर बलिदानी की
यह जय थी ज्वाला की लपटों पर शीतल पानी की

अति भीषण दुर्भिक्ष देख कर काँप रहा था खेड़ा
आवर्तों में ऊभ-चूभ ज्यों काँप रहा हो बेड़ा
उस क्षण जिसकी वज्र-मुट्ठियों ने पतवार सँभाली
वह पटेल ही था अभिनव चाणक्य-सदृश बलशाली

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