anbindhe moti

पवन परी

थिरक अरी वन-उपवन, नव-यौवन-लहरी !
झिलमिल चल तरु-तल में
चंचल मधु-अंचल में
पल दो किसलय-दल में
मर्मर-सी ठहरी

सरसी में सिहर-सिहर
कर निकुंज, गुंजित-स्वर
अभ्रज गिरि-शिखरों पर
जय-ध्वज सी फहरी

कलियों के अधर चूम
लतिका सँग झूम-झूम
थिरक-थिरक छनन-छूम
रणित-चरण बह री

थिरक-अरी वन-उपवन, नव-यौवन-लहरी !

1941