geet vrindavan

सुना जब हरि हैं  जानेवाले

मथुरावासी खड़े हो गए पथ में घेरा डाले

 

नयनों से थे अश्रु उमड़ते

आ-आकर रथ सम्मुख अड़ते

तिल भर नहीं अश्व थे बढ़ते

साँचे  के-से ढाले

 

समझ भाग्य फिर ब्रज के जागे

व्रजवासी लेने को भागे

राधा नंदभवन के आगे

पहुँची सब सखियाँ ले

 

मथुरा-वृन्दावन से कट कर

पर हरि गए द्वारिका-पथ पर

दोनों के दुःख हुए बराबर

किसको कौन सँभाले !

 

सुना जब हरि हैं  जानेवाले

मथुरावासी खड़े हो गए पथ में घेरा डाले