hum to gaa kar mukt huye

मैंने सातों सुर साधे हैं

फिर भी बिना तुम्हारे, मेरे गीत अभी आधे हैं

 

राग गले तक रह जाता है

जग का हृदय न छू पाता है

जुड़ न सका तुमसे नाता है

यों तो मैंने कसकर मन के तार-तार बाँधे हैं

 

मेरे शब्द-भ्रमर गुमसुम-से

मिलकर भी हर कली-कुसुम से

मिले नहीं उपवन में तुमसे

इतना लिख-लिखकर  भी लगता, पृष्ठ सभी सादे हैं

 

मैंने सातों सुर साधे हैं

फिर भी बिना तुम्हारे, मेरे गीत अभी आधे हैं

 

July 86