sita vanvaas

मिला दुःख ही दुःख जब क्षण-क्षण में

कहा कुमारों ने, ‘सुख-वर्णन क्या हो रामायण में!

 

पंचवटी में भी जब आये

क्या श्री राम सुखी रह पाये!

सीता को न देख अकुलाये

चुभा शूल-सा मन में

 

‘बोले लक्ष्मण से कातर-स्वर

“भाई! क्यों तुम गये छोड़कर!

सोचा भी न अकेली स्त्री पर

क्या बीतेगी वन में!” ‘

 

पूरी भी न हुई थी गाथा

प्रभु ने सिहर झुकाया माथा

‘क्यों न मुझे भी यह सूझा था

उसके निर्वासन में!’

मिला दुःख ही दुःख जब क्षण-क्षण में

कहा कुमारों ने, ‘सुख-वर्णन क्या हो रामायण में!