kavita

दूर गगन में तारा टूटा

 

अंधकार ने मुँह फैलाया

सूनापन डँसने को आया

नहीं समझ पाया था कुछ भी वह कि काल ने आकर लूटा

 

व्योम-पटी पर वह अभिमानी

लिख करुणा की अमर कहानी

एक और चल दिया क्षितिज में जैसे भाग्य किसी का रूठा

 

फूलों ने आँसू बरसाए

विरह-गीत कोयल ने गाये

दुखिया रजनी के अंतर से नीरव दुखोछ्वास-सा छूटा

दूर गगन में तारा टूटा