हर मोती में सागर लहरे_Har Moti Me Sagar Lahre

  1. अब तुम बुरा कहो या भला
  2. अब तो आशा एक तुम्हारी
  3. अब तो मुझे टिकानी ही होगी अपनी
  4. अब खुला राज की इस लब्ज़ का मानी क्या है
  5. अब न मधुशाला है न सकी, न घट प्याले
  6. अमृत भरा चाँद जो चमकता था गगन में
  7. अंतर में भावना का जब उफान आता है
  8. आम पाये बबूल भी बोकर
  9. इसी मार्ग से सब गये
  10. उसकी कृपा में यदि विश्वास तेरा सच्चा है
  11. एकएक दिन
  12. कागज़ पर की एक लकीर
  13. काया तो मलमल कर धोयी
  14. काल का सिरहाना, ओढ़े चादर इतिहास की
  15. काव्य महाकवियों के, सुरमय गुनियों के साज
  16. काव्य में दूँ सीख
  17. किधर से आये अबकी धारा
  18. किस सुर में मैं गाऊँ !
  19. गहरी निद्रा से नित्य सोकर जहाँ जाते लोग
  20. चाहे विश्वास करो चाहे करो अविश्वास
  21. चिंता निंदकों की नहीं, कहें जो हो कहना
  22. जब सब करके हारा
  23. जब तक तक स्वर का लेश रहेगा
  24. जाओ हम रखेंगे याद
  25. जिसके बल पर था तुमसे माँगा
  26. जिसको तूने दिया सहारा
  27. जिसे ढूँढने में ज़माने लगे हैं
  28. जितना शब्दों में रख पाया
  29. जो लिखा उसे करके दिखाना होगा
  30. तूने जो वरदान दिये
  31. तेरे लिए जो भी होता है यहाँ
  32. देखा है मैंने सामने इन आँखों के
  33. देनी हो मुझको जो भी व्यथा मनचाही, दें
  34. नया रूप, नव काया
  35. प्रभु !यह श्रद्धा की डोर न टूटे
  36. मत कुछ लिखें, मत कुछ कहें
  37. मधुमय स्मृति बन रहतीं मन में
  38. मिट्टी के रथ को लिए मिट्टी के ये घोड़े
  39. मिलके बिछुड़े जो उनका ग़म हूँ मैं
  40. मुक्ति में मन, सभी दग्ध हों पाप
  41. मैंने उलटी कथा कही
  42. मैंने द्वारनिकट जब गाये
  43. मैं हिमालय की बड़ी चोटियों पे फिरता हूँ
  44. मोह अपनों का और अपने का
  45. रत्नहार ग्रीवा में सदा हूँ जिसे टाँगे
  46. रूप नहीं उसका ही, स्वर्ग से चुरा जो लाया
  47. रूप की माधुरी से मन भर नहीं रहा है
  48. रूप की तृष्णा मिटी न मेटे
  49. लोग सभी तट पर आआकर ठहरे
  50. रूप की तृष्णा मिटी न मेटे
  51. सताती है अब भी तो चिंता
  52. सुरों की धारा में है बहना
  53. श्रम से मिले धन, मान, गुरु से तत्वबोध, ज्ञान
  54. होगा जो होना है
  55. Song of the unknown
  56. I am the uprooted
  57. अग्नि की पारसमणि
  58. आनंद लोक के मंगल आलोक में