सीपी-रचित रेत_Seepi Rachit Ret

  1. अनचाहत की चाह, नहीं यह  
  2. अनुताप – आह ! व्यर्थ सोचना, हुआ  
  3. अपराध – अंतरतम में छिपे कृपण के  
  4. आँधी – नीले, पीले, लाल, बैंगनी 
  5. आवश्यकता थी क्या जीवन की-बढ़ो सिन्धु की प्रलय 
  6. इस दुर्बल तान के मिटने पर 
  7. उत्तरी पवन से – आज नींद से जाग उठे तुम  
  8. उनकी एक प्रशंसात्मक स्थिति-जैसे पावस ऋतू की 
  9. उनकी हँसी – इन्द्रासन पर ज्यों मुझको 
  10. ओ सपनों के राजकुमार !- यों मारे-मारे फिरते तुम 
  11. कवियों से – रत्न जडित पिंजरे में 
  12. कामरूप है देश 
  13. खिलखिल कर हँसती हो जब तुम 
  14. चले गए वे दिन छिपने  
  15. छलनामयी – प्रिय तुम कितनी छलनामय हो 
  16. जब न रहूँगा मैं 
  17. जितना प्यार तुम्हें करता मैं 
  18. जीवन एक दीप ही तो है   
  19. ठहरो मेरे वर्तमान-समां रहा प्रतिपल  
  20. तुम इतनी सुन्दर हो 
  21. तुम्हें देखते ही मन में सिहरन-सी 
  22. दान – सीखी क्या निर्झर से 
  23. दुखांत नाटक का नायक-पृथ्वी रंगमंच है 
  24. देख किसीको मन में  
  25. देखो, भूल गयी न मुझे तुम 
  26. नारंगी की नन्ही-नन्ही कलियों सा 
  27. पछतावा – जैसे भ्रमरावली पैठकर 
  28. परवशता – अब स्वाभाव हो गाया रात दिन 
  29. पावस-प्रिया – रिमझिम-रिमझिम बरस रही है  
  30. प्रेम – कोई हँसे प्रेम को मानव की 
  31. बातचीत – मैं न कभी सुनता  
  32. बासी होता प्रेम कहीं-जब मैं अंतिम आह खींच 
  33. बेढब बनारसी की हीरक जयन्ती के अवसर पर-काशी के कबीर    
  34. मृत्यु-सुन्दर है वह मृत्यु 
  35. मिल न सका क्यों होकर एक 
  36. मेघदूत के यक्ष से-जिनकी बूँदों कि अजस्र 
  37. मेरी कविता – जिस निगूढ़ शुष्मा की 
  38. मेरे गीत और प्रकृति – मेरे गीतों में क्यों आता  
  39. मेरे जीवन का इतिहास – उस मुखड़े पर लिखा हुआ है  
  40. मैं कब यहाँ अकेला था – मुझे नहीं इसका दुःख 
  41. मैंने जितना प्यार किया है 
  42. रहस्यमयी – यदि मैं पाता देख  
  43. राजस्थान के सैकत टीलों में- यह कठोर शिशुपालन 
  44. लजालू प्रेमी – शीघ्रे लजालू प्रेमी कैसे  
  45. वह रजनी – सजनी! वह रजनी भी  
  46. विकलता – आह विकलते 
  47. विरही – सोया-सोया देख रहा मैं 
  48. विरहिणी – देख रहा मैं दूर चाँदनी के 
  49. वे आँखें – जादू है कुछ पर्दे में 
  50. शाश्वत सौन्दर्य – एक फूल के कुम्हलाते ही  
  51. शिशिर-बाला – अर्धनग्न-तनु, मुख पर झीना  
  52. सपना – सपने में देखा है मैंने 
  53. स्वप्न और यथार्थ- तुमसे पाकर भीख स्नेह की 
  54. साधारण बातें – मैं घंटों सोचा करता हूँ 
  55. सुख-दुःख – जीवन सुखमय कर सकती है  
  56. एक गाँव में रहते – सीपी रचित रेत 
  57. सुन्दरता और कविता