अहल्या_Ahalya

  • “कवि के शब्द-चयन, उसके भाषा के अधिकार, सुन्दर वर्णमैत्री और अभिव्यक्ति की सामर्थ्य ने मुझे अत्यन्त प्रभावित किया है। प्रांजल और संस्कृतनिष्ठ होते हुये भी कहीं भी मुझे क्लिष्‍टता नहीं दीख पड़ी. भाषा पर कवि का असाधारण अधिकार है। इस काव्य का प्रकाशन एक ’घटना’ है और मुझे विश्वास है कि यह काव्य कालांतर में हिन्दी का एक गौरव-काव्य माना जायेगा.”

-पद्मभूषण पं॰ श्रीनारायण चतुर्वेदी

  • “जिस विषय पर पुराणों से लेकर आधुनिक काल तक अनेक महान कलाकारों ने लिखा है, उसपर कुछ नया या नये ढंग से लिखना आसान नहीं है। लेकिन इस दुष्कर कार्य का संपादन गुलाबजी ने बहुत सफलता के साथ किया है।”

श्री गंगाशरण सिंह (अध्यक्ष अ. भा. हिन्दी संस्था संघ)