दिया जग को तुझसे जो पाया_Diya Jag Ko Tujhse Jo Paya

  1. अब मैं शरण तुम्हारी 
  2. अटल है जो उसने लिख डाला
  3. आत्माओ ! महान कवियों की
  4. आस है वृथा स्वाति के कण की
  5. इसीको भेजा था स्रष्टा ने !
  6. इसीमें पाया है विश्राम
  7. उन चरणों की रज भी पाकर
  8. एक निद्रा से तो तू जागे
  9. कभी इस पर थी कृपा तुम्हारी
  10. कभी ज्यों नभ पथ से आती हो
  11. करुणा, क्षमा, दया, प्रायश्चित
  12. कविता में जीवन है सारा
  13. कृपा तो मुझ पर रही अपार
  14. कृपा तो कभी तुम्हारी होगी
  15. काल ने जब भी मुझको घेरा
  16. काल !यह सृष्टि तुझीसे हारी
  17. काल ! तू कब किसका हो पाया !
  18. क्या फल लौट यहाँ फिर आये
  19. क्या हो रत्न-विभूषण पाए 
  20. कितने रूपों में आ-आकर
  21. कीर्ति की महिमा भली बखानी
  22. कैसे तुझे रिझाऊँ, स्वामी !
  23. कैसे प्राण बचायें ! 
  24. क्यों तू चिंता करे, अभागे ! 
  25. क्यों तू मरे व्यर्थ चिंता 
  26. कौन लेगा ये रत्न उधार
  27. कौन हम और कहाँ से आये  
  28. खेल है यह किसी जादूगर का
  29. खोल दो सुरमंदिर का द्वार
  30. गीत गा-गाकर तुझे रिझाऊँ
  31. गाते-गाते तुझको पाऊँ 
  32. छोड़ इस घर को  जब जाएगा
  33. छोड़ दे ममता इस वीणा की 
  34. जब मैं सदा साथ हूँ तेरे
  35. जग अपूर्णता का ही फल है
  36. जब तक गुँथ पायेगा हार
  37. जिसने हँस-हँस गरल पिया है
  38. जीवन दुख से भरी कहानी
  39. तेरी लीला की बलिहारी
  40. तेरे सुख-दुख का क्या मोल !
  41. द्वन्द जग के चित में 
  42. दिया जग को तुझसे जो पाया
  43. दुख में भी निश्चल अंतर हो
  44. दुखों में दुख ही क्यों तू माने   
  45. देखूँ फिर-फिर नभ की ओर
  46. देहली का यह जीवन न्यारा
  47. नज़र से होंठ पर _ग़ज़ल
  48. नाथ ! तुम जिसको अपना लेते
  49. नाथ ! यह कैसी रीति तुम्हारी !
  50. नाथ ! क्या दोगे यह अवकाश
  51. नाविक ! ले जा अपनी नाव
  52. नाम-रूप दोनों हों झूठे
  53. पकड़े राम नाम की डोर
  54. परीक्षा मेरी नहीं, तुम्हारी
  55. प्रभु ! इस बंधन की बलिहारी
  56. पेड़ तो रोपे कई हजार
  57. प्राण तेरे सुर में हैं ढाले
  58. प्रेम का बंधन कैसे तोडूँ
  59. प्रेम,प्रभु ! तूने सदा निभाया
  60. बँटने दो प्रसाद औरों हित
  61. बनूँ देहली का पत्थर मैं
  62. बासी फूल नहीं लाऊँगा
  63. भले ही सब मिटता 
  64. भले ही सारा जग मुंह फेरे
  65. भूलता सारे दुःख संताप 
  66. मन यदि पूर्णकाम रह पाये
  67. मंगल-कामना
  68. माना यही वसंत न होगा
  69. मुझको भली-भांति लो जान
  70. मूढ़ ! क्यों ढूँढे जग का मान !
  71. मेरी वीणा मौन न होगी 
  72. मेरे अन्तर्वासी राम
  73. मैं तो जल पर बिंब तुम्हारा
  74. मैं मोती हूँ सागरतल का 
  75. मैंने गीत यहाँ जो गाये
  76. मैंने पत्र-पुष्प जो पाये
  77. मोल कोई तेरा क्यों आँके
  78. मोह निजता का छोड़ न पाऊँ
  79. यदि मैं भूल न करता
  80. यह तप का भ्रम क्यों पाला है !
  81. राग क्यों मौन किये अंतर के !
  82. राग जो भी अंतर से आया
  83. राग जो अंतर में छाया है
  84. लगन सच्ची है यदि इस मन की
  85. लिये प्रभु ! यह गीतों का हार
  86. विरोधी बन मुँह कहाँ छिपाऊँ !
  87. शत नमन तुझे, ओ महाकाल
  88. संबल मुझे क्षमा का तेरी
  89. सँभाला तेरी ही करूणा ने
  90. स्वामी ! वह प्रतीति दो मन की
  91. सुरों के बंधन मैंने खोले
  92. स्नेह तेरी करुणा का पाकर 
  93. ह्रदय में जब है तेरा वास
  94. हाथ में तेरे है जब डोर
  95. हे रवींद्रनाथ !
  96. हे जगकर्ता ! तुझे प्रणाम