Bhakti Ganga

  1. अकेला चल 
  2. अकेले मुझको छोड़ न देना 
  3. अच्छे रहे मन से जो तुम्हारे ही रहे 
  4. अचरज मुझको, कैसे तुझ तक करुण पुकार गयी थी 
  5. अपना बानक आप बनाओ 
  6. अपनी सेवा का अवसर दे 
  7. अपने रँग में मुझे रँगा दे 
  8. अपरिमित दया, दयामय! तेरी 
  9. अपेक्षा जग में सबसे त्यागी 
  10. अपेक्षा जग में क्या करता है 
  11. अब क्या माँगूँ आगे! 
  12. अब कहाँ बसेरा अपना! 
  13. अब यह खेल आप ही खेलो 
  14. अब यह घटा बरस ले जमके 
  15. अब यह नौका फँसी भँवर में 
  16. अयि मानस-कमल-विहारिणी 
  17. अक्षय है भण्डार तेरा 
  18. आया चरण-शरण में बेसुध थककर चारों ओर से 
  19. इतने ठाठ व्यर्थ क्यों बाँधे 
  20. इसमें तेरी कौन बड़ाई 
  21. इसलिए मैं व्यक्त से अव्यक्त होना चाहता हूँ  
  22. एक बस तुझसे बनी रहे 
  23. एक सच्चा तेरा नाता है 
  24. ऐसे ही रह लूँगा 
  25. ओ मेरे मन! 
  26. ओ मेरी मानस-सुंदरी! 
  27. ओ सहचर अनजाने! 
  28. और क्या तुझे चाहिए, बोल 
  29. अंतर से मत जाना 
  30. कटे दिन काँवर ढोते-ढोते 
  31. कभी तो अगला ठाठ सजाओ 
  32. कभी तो ठहरे यह मन मेरा 
  33. कभी यदि ऐसा देखो कोई 
  34. क्या नहीं इस जीवन में पाया 
  35. क्यों तुम दूर-दूर हो छाये? 
  36. क्यों तू उसको देख न पाया? 
  37. क्यों तू चिंता करे अभागे? 
  38. क्यों तू माला व्यर्थ बनाये? 
  39. क्यों तू मुझे भेज कर समझे तेरा काम हो गया पूरा? 
  40. करूँ क्या, यदि मन हो न विरागी? 
  41. करुणामय! तेरी करुणा का मधुर भार झेलूँ कैसे! 
  42. कल की कल देखी जाएगी 
  43. कहाँ तक उड़ती जाए पतंग? 
  44. कहाँ मुक्ति का द्वार? 
  45. कहाँ वह पीर प्रेम की पाऊँ? 
  46. काल की हो अनंत भी धारा 
  47. कितनी भूलें नाथ गिनाऊँ! 
  48. कितने जीवन, कितनी बार! 
  49. कितने बड़े हाथ हैं तेरे! 
  50. किस-किस का दूँ धन्यवाद मैं तुझको, मेरे दैव, बता! 
  51. किसने जीवन दीप जुगाया? 
  52. किस सुर में मैं गाऊँ? 
  53. कुछ भी और न लूँगा 
  54. कुछ भी बदले में नहीं लेना है 
  55. कुछ भी मत हो, मत हो, मत हो 
  56. कैसी अद्भुत तेरी माया! 
  57. कैसे आऊँ द्वार तुम्हारे? 
  58. कैसे आऊँ शरण तुम्हारी! 
  59. कैसे तेरे सुर में गाऊँ? 
  60. कैसे पहुँचूँ तुझ तक, स्वामी! 
  61. कैसे पार उडूँ जीवन के? 
  62. कैसे बजे बीन? 
  63. कैसे मुझे संभालोगे? 
  64. कैसे यह अभिनय कर पाऊँ? 
  65. कैसे रूप तुम्हारा देखूँ? 
  66. कोई साथ न होगा 
  67. कौन अपना है, कौन पराया! 
  68. कौन इस पीड़ा को पहिचाने! 
  69. कौन सा रूप ध्यान में लाऊँ? 
  70. कृपा का कैसे मोल चुकाऊँ! 
  71. खेल लेने दो मन के दाँव 
  72. गीत तो रच-रचकर लिख डाले 
  73. चला मैं सदा लीक से हटके 
  74. चाह यह नहीं, पूर्ण निष्कृति दो 
  75. चिंता क्या! मन रे! 
  76. चिंता किस-किस की करिए! 
  77. चिंता नहीं फूल जो गुँथकर माला में न गले तक पहुँचा  
  78. चित्र भी यदि मिटनेवाले हैं! 
  79. छोड़ मत देना पथ के बीच 
  80. जब तक तेरे निकट न आऊँ 
  81. जब तक हाथों में है वीणा 
  82. जब मैं सोते से जागूँगा 
  83. जलो वैश्वानर! खूब जलो 
  84. जाने कौन व्यथा जीवन की! 
  85. जिस क्षण चलने की वेला हो 
  86. जीवन तुझे समर्पित किया 
  87. जीवन तो केवल प्रवाह है! 
  88. जीवन सफल करो 
  89. जीवन-स्वामी! 
  90. झलक भी यदि न रूप की पाऊँ 
  91. तभी तक है सपनों का फेरा 
  92. तारा जो व्योम से गिरा 
  93. तीर तो तान-तानकर मारे 
  94. तुझको पथ कैसे मिल पाये! 
  95. तुझको पथ कैसे सूझेगा! 
  96. तुझे तार जुड़ा है मेरा 
  97. तुम्ही दुख में आड़े आते हो 
  98. तुम हो मेरे पास निरंतर फिर यह अंतर क्या है? 
  99. तूने जो बोये सो काटे 
  100. तूने कितना नाच नचाया! 
  101. तूने कैसा खेल रचाया! 
  102. तूने मुझको कितना चाहा! 
  103. तू ही तू जब दायें-बायें 
  104. तू ही नहीं अधीर 
  105. तू है तो, भय क्या! 
  106. तेरी करुणा आड़े आयी 
  107. तेरी बिगड़ी कौन बनाये! 
  108. तेरा साथ नहीं छोडूँगा 
  109. दर्पण कैसे उन्हें दिखाये! 
  110. दया यह भी कम न थी तुम्हारी 
  111. दुख यह किसके आगे रोऊँ! 
  112. दुनिया काँटों की क्यारी है 
  113. दुनिया मेरी है या तेरी 
  114. न जाने क्या होगा उस ओर 
  115. न मिलता यदि अवलंब तुम्हारा 
  116. नहीं कभी भागूँगा जग से, सब कुछ सहन करूँगा 
  117. नहीं कहीं विश्राम 
  118. नहीं भी इस तट पर आयेंगे 
  119. नहीं यदि तुझ तक भी पहुँचेगी 
  120. नहीं यदि तू भी दया करेगा 
  121. नहीं यदि तेरा मिले सहारा 
  122. नहीं यदि तेरा ही मन माने 
  123. नहीं यदि मेरा त्रास हरोगे 
  124. नहीं विराम लिया है 
  125. न है मेरे दोषों की माप 
  126. नाचते बीती सारी रात 
  127. नाच रे मयूर मन! नाच रे! 
  128. नाथ! क्या माँगूँ चाँदी-सोना 
  129. नाथ! क्यों डांड़ चलाना छोड़ा?  
  130. नाथ! तुम कब से हुए विरागी? 
  131. निर्जन सागर-वेला 
  132. नींद कब सुख की आएगी? 
  133. पथ का छोर कहाँ है? 
  134. पत्री मैंने भी भिजवायी 
  135. पापिनी ईर्ष्या डूब मरे 
  136. पाँव हम तेरे पकड़े रहे   
  137. प्यार यदि है तो आगे आओ 
  138. प्रतिदिन, प्रतिपल, साथ तुम्हारे 
  139. प्रभु! यह महाभीरु मन मेरा 
  140. प्रेम की पीड़ा पल न भुलाऊँ 
  141. प्रेम प्रभु चरणों में दृढ़ होता 
  142. पूछते भी अब तो डरता हूँ 
  143. फूल मुरझाने लगा है 
  144. बड़ी भीड़ है, देव! तुम्हारे द्वार पर 
  145. बरसो, हे करुणा के जलधर! 
  146. बाँधकर नियमों से जग सारा 
  147. बिगड़ी बात बनाते हो तुम 
  148. बैठ कर मेरे सुर में गाओ 
  149. बैठा हूँ आकर तेरी देहली के पास 
  150. भगवती, आद्याशक्ति, भवानी! 
  151. भय से दो त्राण 
  152. भरोसा है तेरे ही बल का 
  153. भला इस जीवन का क्या अर्थ 
  154. भाग्य पर दोष व्यर्थ मढ़ता है 
  155. मन का ताप हरो 
  156. मन का यह विश्वास न डोले 
  157. मन का विष हरण करो हे! 
  158. मन! जान रहा है जब तू जो भी पाये खोना है 
  159. मन! तू अब भी तोष न माने 
  160. मन मेरे! नीलकंठ बन 
  161. मन रे! किसने तुझे लुभाया! 
  162. मन रे! डांड न छूटे कर से 
  163. महासिंधु लहराता 
  164. मंगल साज सजे 
  165. मन कुछ मेरा न यहाँ था 
  166. मार्ग अनदेखा, लक्ष्य अजाना 
  167. मार्ग कैसा भी बीहड़ आये 
  168. मिलन की बेला बीत गयी 
  169. मुक्ति नहीं, भक्ति चाहिये 
  170. मुझ-सा कौन यहाँ बड़भागी! 
  171. मुझे तो एक भक्ति का बल है 
  172. मुझे तो लहर बना रहने दो 
  173. मुझे तो वही रूप है प्यारा 
  174. मुझे न होगी धन की चिंता 
  175. मुझे फिर है इस जग में आना 
  176. मुझे भी अपना दास बनाओ 
  177. मुझे भुला मत देना 
  178. मेरा अंत न होगा 
  179. मेरा मन विश्राम न जाने 
  180. मेरी छाया मुझसे आगे 
  181. मेरी दुर्बलता ही बल है 
  182. मेरी वीणा, तान तुम्हारी 
  183. मेरे अंतर में छा जाओ 
  184. मेरे जीवन-स्वामी! 
  185. मेरे संग-संग चलने वाले! 
  186. मैं आँधी का तिनका 
  187. मैं इस घर से निकल न पाया 
  188. मैं तो बस चुप मार रहूँगा 
  189. मैंने दर्पण तोड़ दिया है 
  190. मैंने तुझको ही गाया है 
  191. मैंने तेरी तान सुनी है 
  192. मैंने तो केवल भाषा दी है 
  193. मैंने रात चैन से काटी 
  194. मैंने वंशी नहीं बजाई 
  195. मैंने सातों सुर साधे हैं 
  196. यदि मैं चित्र न देखूँ तेरे 
  197. यदि मैं तुम्हें भूल भी जाऊँ 
  198. यदि हम तुझमें ही जीते हैं 
  199. यदि हम सेवा में सुख पायें 
  200. यह तो शीशमहल है 
  201. यह मन बड़ा हठी है, नाथ! 
  202. यह शोभा किस काम की 
  203. यों तो कालिंदी है काली 
  204. रक्षा करो इनकी, प्रभु! काल के झकोरों से 
  205. राजसिंहासन के बदले 
  206. लिखूँ क्या, जब तक तू न लिखाये 
  207. वही है धरा, वही है अम्बर 
  208. वही हो नाव, वही हो धारा 
  209. विवशता हैं ये तानें मेरी 
  210. वृथा ही तू क्यों जूझ मरे! 
  211. व्यर्थ क्यों घुट-घुट मरना है! 
  212. शक्ति दे, मन को सुदृढ़ बनाऊँ! 
  213. शरण में, माँ! मुझको भी ले ले 
  214. सब कुछ कृष्णार्पणम 
  215. सब कुछ तो हो चूका समर्पित प्रथम मिलन की रात में 
  216. सब कुछ साथ-साथ चलता है 
  217. सब कुछ स्वीकार 
  218. सबने तो लिये लूट निज-निज भाग 
  219. सभी फल तोड़-तोड़ ले जायें 
  220. समस्या बड़ी कठिन अब आयी 
  221. सहज हो प्रभु साधना हमारी 
  222. सहारा देते रहो निरंतर 
  223. सही कर दे तू, तभी सही है 
  224. सातों सुर बोलेंगे 
  225. सारी भव-व्याधियों से परे 
  226. सारी धरती डेरा अपना 
  227. सोच में यदि दिन रात मरुँ 
  228. हम तो अपने में ही फूले 
  229. हम तो गाकर मुक्त हुए 
  230. हम तो यही खेल खेलेंगे 
  231. हम तो रँगे प्रेम के रँग में 
  232. हमने नाव सिन्धु में छोड़ी 
  233. हमारी टूट गयी है डोर 
  234. हमारे कहने पर मत जायें 
  235. हर संध्या श्रृंगार किये मैं देखूँ खड़ी-खड़ी 
  236. हाथ से छूट रही है वीणा 
  237. हाथ से साज नहीं छोड़ा है 
  238. हार नहीं मानूँगा 
  239. हे प्रभु! सब अपराध हमारे क्षमा करो 
  240. क्षमा का ही तेरी संबल है 
  241. क्षमा यदि न कर सके अपराध